भारतीय वायुसेना की ताकत बढ़ाने के लिए रक्षा मंत्रालय एक ऐतिहासिक कदम उठाने जा रहा है. सूत्रों के मुताबिक, मंत्रालय करीब 3.25 लाख करोड़ रुपये की लागत से 114 राफेल फाइटर जेट्स खरीदने की तैयारी में है. इस प्रस्ताव पर रक्षा मंत्रालय की उच्च स्तरीय बैठक में चर्चा होने वाली है. यह सौदा भारतीय वायुसेना की घटती स्क्वाड्रन संख्या को देखते हुए बेहद अहम माना जा रहा है.मेक इन इंडिया पर जोरइस मेगा डील की सबसे बड़ी शर्त यह है कि इन विमानों का निर्माण भारत में ही किया जाएगा. रक्षा मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि इस प्रोजेक्ट में लगभग 30 प्रतिशत स्वदेशी तकनीक और पुर्जों का इस्तेमाल होगा. इससे न केवल भारत की रक्षा क्षमता बढ़ेगी, बल्कि घरेलू एयरोस्पेस इंडस्ट्री को भी बड़ा प्रोत्साहन मिलेगा. विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम भारत को रक्षा उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक बड़ी छलांग साबित होगा.रणनीतिक बढ़त और सामरिक रिश्तेराफेल जैसे अत्याधुनिक लड़ाकू विमान भारत को चीन और पाकिस्तान के साथ संभावित टू-फ्रंट वॉर की स्थिति में रणनीतिक बढ़त दिलाएंगे. इन विमानों की तैनाती से सीमाओं पर भारत की चौकसी और प्रतिक्रिया क्षमता कई गुना बढ़ जाएगी. इसके अलावा, यह डील भारत और फ्रांस के बीच रक्षा सहयोग को नई ऊंचाई पर ले जाएगी. फ्रांस की कंपनी डसॉल्ट एविएशन के साथ यह साझेदारी भारत के लिए तकनीकी हस्तांतरण और दीर्घकालिक रक्षा सहयोग का मार्ग प्रशस्त करेगी.










