अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शांति का नोबेल पुरस्कार पाने के लिए हर पैंतरा आजमा लिया है. 2 साल की जंग के बाद ट्रंप के नेतृत्व में गाजा की जंग खत्म हो गई है, इजरायल और हमास के बीच सीजफायर डील पर मुहर लग गई है लेकिन यह होते होते इतनी देर हो गई कि ट्रंप का नोबेल जीतना बहुत मुश्किल माना जा रहा है. शुक्रवार को ही शाम तक शांति के नोबेल पुरस्कार विजेता का ऐलान हो जाएगा. लेकिन लगता है कि ट्रंप ने उम्मीद नहीं छोड़ी है.ट्रंप ने कोई ऐसा मौका छोड़ा नहीं जहां उन्होंने यह दिखाने की कोशिश नहीं की है कि वो शांतिदूत हैं और उन्हें शांति का नोबेल किसी कीमत पर चाहिए. ट्रंप ने तो कई बार इसी पुरस्कार के लिए झूठे दावे तक कर दिए. जैसे उन्होंने भारत और पाकिस्तान के सीजफायर कराने का झूठा श्रेय खुद को दर्जनों बार दिया है.नोबेल की चाह में ओबामा तक को घेराअमेरिकी राष्ट्रपति ने नोबेल शांति पुरस्कार की चाह में इसे जीतने वाले अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा की उपलब्धियों को ही नकार दिया है. ट्रंप ने कह दिया कि ओबामा ने “कुछ नहीं किया” और “हमारे देश को नष्ट कर” दिया. व्हाइट हाउस में पत्रकारों से बात करते हुए, ट्रंप ने गाजा में शांति हासिल करने और “आठ युद्धों” को समाप्त करने में अपनी उपलब्धि का जिक्र किया. पुरस्कार की घोषणा से कुछ ही घंटे पहले ट्रंप ने शिकायत की कि ओबामा को राष्ट्रपति बने कुछ ही महीने हुए थे और उन्होंने नोबेल जीत लिया था. ट्रंप ने कहा, “उन्हें यह कुछ नहीं करने के लिए मिला है. ओबामा को पुरस्कार मिला. उन्हें यह भी नहीं पता कि क्यों. उन्हें चुना गया. उन्होंने हमारे देश को नष्ट करने के अलावा कुछ भी नहीं करने के लिए ओबामा को यह पुरस्कार दिया.”










