मुल्लाओं को ईरान छोड़ना होगा, तानाशाही मुर्दाबाद… पिछले कुछ दिनों से ईरान में यही नारे सुनाई दे रहे हैं. खामेनेई सरकार के खिलाफ लोग सड़कों पर उतर चुके हैं और हिंसक प्रदर्शन जारी हैं. महंगाई के खिलाफ ये प्रदर्शन शुरू हुआ था, लेकिन अब इसे ईरान के धर्म गुरुओं के खिलाफ भी माना जा रहा है. यही वजह है कि लोग मुल्लाओं को देश छोड़ने की हिदायत दे रहे हैं. आज हम आपको मुस्लिम धर्म गुरुओं और मौलवियों के लिए इस्तेमाल होने वाले शब्द मुल्ला और अयातुल्ला के बीच का अंतर बताएंगे. साथ ही ये भी बताएंगे कि क्यों ईरान के लोग इनसे नाराज हैं. इस पूरे मुद्दे पर बात करने के लिए हमने इस्लामिक मामलों के जानकार डॉ मुमताज आलम रिजवी से बातचीत की. क्या होते हैं अयातुल्ला?इस्लाम में अयातुल्ला एक सर्वोच्च पदवी है, इसे अल्लाह की निशानी भी कहा जाता है. शिया मुस्लिमों के लिए ये एक सम्मानजनक पद होता है. आमतौर पर सबसे विद्वान मौलवियों को ये उपाधि मिलती है. 1979 की इस्लामिक क्रांति में सबसे अहम भूमिका निभाने वाले अयातुल्ला रुहोल्लाह खुमैनी सबसे ज्यादा मशहूर आयतुल्लाह थे, जो ईरान के सर्वोच्च नेता चुने गए. उनके बाद अब अयातुल्ला अली खामेनेई के हाथों में ईरान की सत्ता है










