मिसाइल, ड्रोन या फिर साइबर अटैक… ईरान पर हमले के ये 6 विकल्प, कौन सा हथियार आजमाएगा अमेरिका

ईरान में अली खामेनेई के नेतृत्व वाली इस्लामिक सरकार सालों में घरेलू अशांति की सबसे गंभीर लहर का सामना कर रही है. ईरान के आम लोग बागी हो गए हैं. इस्लामिक रिपब्लिक में सत्तारूढ़ सरकार और उसकी कुख्यात सेना के खिलाफ विरोध प्रदर्शन पूरे देश में फैल गया है. रिपोर्टों से पता चलता है कि ईरानी अधिकारियों की व्यापक कार्रवाई के दौरान 2,500 से अधिक लोग मारे गए हैं. इन सबके बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ऐसे नाजुक समय में ईरान के खिलाफ संभावित सैन्य कार्रवाई की बार-बार चेतावनी दी है.ट्रंप ने सार्वजनिक रूप से प्रदर्शनकारियों के समर्थन में ईरान के अंदर सैन्य हस्तक्षेप करने का विचार रखा है. ट्रंप की इन चेतावनियों से वाशिंगटन और तेहरान के बीच तनाव बढ़ गया है. ईरान में फैली अशांति वहां के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की सत्ता पर पकड़ को चुनौती दे रही है, तो ट्रंप की धमकी एक कदम आगे जाकर उस दबाव को कहीं अधिक बढ़ा रही है.ओमान, कतर, बहरीन, कुवैत और इराक में अमेरिका के सैन्य बेस हैं और इस तरह अमेरिका पूरे मिडिल ईस्ट में एक महत्वपूर्ण सैन्य उपस्थिति बनाए रखता है. अमेरिका ने मिडिल ईस्ट में लंबे समय से चले आ रहे रणनीतिक निवेश किया है. हालांकि पूरे मिडिल ईस्ट में अमेरिकी सेना की मौजूदगी का एक पक्ष यह भी है कि अगर कोई मजबूत क्षेत्रीय ताकत बदला लेने पर उतर आए तो उसके पास हमला करने को विकल्प भी बहुत सारे होंगे.पिछले साल, ईरान ने इस क्षेत्र में एक अमेरिकी अड्डे को निशाना बनाया था, जिसके बाद वाशिंगटन को ऐसे ही एक बेस में सैनिकों की संख्या कम करनी पड़ी थी. पिछले साल जून में, ईरान ने कतर में अल उदीद बेस पर हमला करके फिर से अपनी पहुंच का प्रदर्शन किया था. ईरान ने कहा कि यह हमला ईरान के परमाणु ठिकानों पर अमेरिकी हमलों का बदला था. उस घटना के बाद, सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई के वरिष्ठ सलाहकार अली शामखानी ने ट्रंप को चेतावनी जारी करते हुए कहा कि हमला “ईरान की किसी भी हमले का जवाब देने की इच्छा और क्षमता” दिखाता है.

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