बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने रविवार को चुनाव प्रचार के दौरान केंद्र की सत्ताधारी पार्टी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर जमकर निशाना साधा।
पूर्व बर्द्धमान के मंतेश्वर में तृणमूल कांग्रेस के उम्मीदवार सिद्दीकुल्ला चौधरी के समर्थन में आयोजित एक जनसभा को संबोधित करते हुए ममता ने कहा कि विपक्षी दल राज्य में भय का माहौल बनाने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन बंगाल की जनता इसका जवाब लोकतांत्रिक तरीके से देगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि वे बंगाल में युद्ध की गाड़ियां लेकर आए हैं, मानो कोई वास्तविक युद्ध होने वाला हो। लेकिन उन्हें जान लेना चाहिए कि हम डरने वाले नहीं हैं। हम लोकतंत्र के माध्यम से इस लड़ाई को लड़ेंगे और उन्हें परास्त करेंगे।
प्रवासियों को गुमराह करने और धर्म की राजनीति का आरोप
ममता बनर्जी ने भाजपा पर प्रवासी श्रमिकों की भावनाओं के साथ खेलने का गंभीर आरोप लगाया। उन्होंने दावा किया कि बाहर से आने वाले मजदूरों को धार्मिक ग्रंथों की शपथ दिलाकर भाजपा के पक्ष में मतदान करने के लिए मजबूर किया जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने तंज कसते हुए कहा कि प्रवासी श्रमिकों को गीता और अन्य धर्मग्रंथों की कसम खिलवाई जा रही है कि वे भाजपा को ही वोट देंगे। यह राजनीति का गिरता हुआ स्तर है।
प्रधानमंत्री पर तीखा हमला: आंसुओं से चेहरा बचाने की कोशिश
महिला आरक्षण बिल और हालिया विधायी घटनाक्रमों का जिक्र करते हुए ममता बनर्जी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर सीधा निशाना साधा। उन्होंने कहा कि पिछले शुक्रवार को लोकसभा में उनकी हार हुई है। अब वे रो-रोकर अपनी छवि बचाने की कोशिश कर रहे हैं।
भाजपा महिलाओं के सम्मान की बात तो करती है, लेकिन उनके मन में खोट है। मुख्यमंत्री ने सवाल उठाया कि 2023 में पारित होने के बावजूद नारी शक्ति वंदन अधिनियम (महिला आरक्षण बिल) को अब तक प्रभावी ढंग से लागू क्यों नहीं किया गया? उन्होंने आरोप लगाया कि जब भाजपा की मंशा उजागर हो गई, तो विपक्षी दल एकजुट हो गए और सरकार को सदन में मुंह की खानी पड़ी।
चुनावी रैलियों का महादंगल
उल्लेखनीय है कि रविवार को मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का बेहद व्यस्त चुनावी कार्यक्रम रहा। उन्होंने तारकेश्वर से अपने अभियान की शुरुआत की, जिसके बाद कालना, मंतेश्वर और बर्द्धमान दक्षिण विधानसभा क्षेत्रों में जनसभाओं को संबोधित कर तृणमूल कांग्रेस के पक्ष में लहर बनाने की कोशिश की।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ममता बनर्जी का यह कड़ा रुख राज्य में चुनावी ध्रुवीकरण और स्थानीय बनाम बाहरी के विमर्श को और तेज करेगा।










