बहादुरगढ़ थाने में सात मार्च को कुछ पुलिसकर्मियों की ओर बाइक सवार कपल से 20 हजार रुपये रिश्वत लेने का मामला फिर सुर्खियों में आ गया है। सस्पेंड सिपाही ने जांच अधिकारी पर गंभीर आरोप लगाते हुए खुद को बेगुनाह बताया है।
बहादुरगढ़ थाना पुलिस के चार पुलिस कर्मियों ने प्राइवेट कार में सवार होकर छह मार्च की रात्रि बाइक सवार गढ़मुक्तेश्वर के प्रेमी युगल को सलारपुर गांव के पास से पकड़ लिया था।
इस दौरान प्राइवेट कार में पहुंचे चार पुलिस कर्मियों ने उसका मोबाइल एवं ड्राइविंग लाइसेंस छीन लिया था और सात मार्च को कानूनी कार्रवाई का डर दिखाते हुए 20 हजार रुपये वसूले थे।
रुपये वसूलने के दौरान पीड़ित पक्ष के लोग थाने पहुंचे, जहां से एक पुलिसकर्मी वर्दी में उनको लेकर एक आवास में पहुंचा था, जहां 50 हजार रुपये की मांग की गई थी तथा 20 हजार रुपये में बात तय हुई थी।
जबकि तीन अन्य आरोपित को क्लीन चिट दे दी गई थी। अब इस मामले में सस्पेंड सिपाही गजेंद्र शर्मा ने जांच अधिकारी पर सवाल खड़ा कर दिया है। उनका कहना है कि उसका इस प्रकरण से कोई लेना देना नही था। थाने में तैनात एक सिपाही उन युवकों को लेकर उसके कमरे में आया था और उसने ही उनसे बात की थी।
लेकिन जांच अधिकारी एवं वो सिपाही की एक ही जाति है, जिस कारण उसको बचाकर मुझे बलि का बकरा बना दिया गया। बता दें कि दैनिक जागरण ने भी इस जांच को लेकर कई तरह के सवाल उठाए थे, लेकिन उन सवालों को भी संभवत जांच के केंद्र बिंदू में नहीं रखा गया।










