RTE का 25% कोटा SOP से नहीं, कानून से लागू होगा: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को स्पष्ट किया कि निजी गैर-सहायता प्राप्त स्कूलों में कमजोर वर्ग और वंचित समूह के बच्चों के लिए 25% आरक्षण केवल सरकारी SOP (Standard Operating Procedures) के आधार पर लागू नहीं किया जा सकता. इसके लिए राज्यों को बाध्यकारी नियम बनाने होंगे.जस्टिस पी.एस. नरसिम्हा और जस्टिस अतुल एस. चंदुरकर की पीठ ने दिनेश बिवाजी अष्टिकर बनाम महाराष्ट्र राज्य मामले में कहा कि बाल अधिकार संस्थाओं द्वारा जारी SOP को कानून का दर्जा प्राप्त नहीं है और वे RTE Act की धारा 38 के तहत बनाए जाने वाले नियमों का विकल्प नहीं हो सकते. इन दिशानिर्देशों का कोई कानूनी बल नहीं है. इनके उल्लंघन पर कोई जवाबदेही तय नहीं होती. यदि बाध्यकारी नियम नहीं बनाए गए, तो अनुच्छेद 21A और RTE Act की धारा 12(1)(c) मृत अक्षर बनकर रह जाएगी.कोर्ट ने कहा कि निजी स्कूलों में 25% सीटें गरीब और वंचित बच्चों के लिए आरक्षित करने का प्रावधान केवल SOP के भरोसे छोड़ देने से व्यवस्था विफल हो गई है और इससे बच्चों के शिक्षा के मौलिक अधिकार का उल्लंघन हो रहा है.

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