इलाहाबाद हाईकोर्ट ने नोएडा स्थित मैरियन बायोटेक प्राइवेट लिमिटेड और उसके निदेशकों द्वारा दायर चार क्रिमिनल रिवीजन याचिकाओं को खारिज कर दिया है. यह मामला साल 2022 में भारत निर्मित कफ सिरप के सेवन से उज्बेकिस्तान में कथित तौर पर 18 बच्चों की मौत से जुड़ा है. जस्टिस हरवीर सिंह की सिंगल बेंच ने स्पष्ट किया कि सार्वजनिक स्वास्थ्य से जुड़े कानूनों को तकनीकी बारीकियों के आधार पर बाधित नहीं किया जा सकता है. कोर्ट ने माना कि ट्रायल कोर्ट (नोएडा CJM कोर्ट) द्वारा जारी समन और संज्ञान आदेश पूरी तरह कानून के अनुसार है और इसमें किसी हस्तक्षेप की आवश्यकता नहीं है.
तकनीकी आपत्तियों को कोर्ट ने किया दरकिनारमामले की सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं के वकील ने दलील दी थी कि जिस टेस्ट एनालिसिस रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई की गई, उसमें ड्रग्स रूल्स, 1945 के नियम 46 का पालन नहीं हुआ है. हालांकि, कोर्ट ने इन तर्कों को केवल “तकनीकी बातें” करार दिया. कोर्ट ने कहा कि घटिया और जहरीली दवाएं स्वास्थ्य प्रणाली के लिए एक गंभीर खतरा हैं. ऐसे में अधिकारियों की जवाबदेही और प्रक्रियात्मक कमियों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता. कोर्ट ने यह भी जोड़ा कि आरोपियों को अभी ट्रायल कोर्ट में आरोप तय होने के समय खुद को निर्दोष साबित करने का पूरा अवसर मिलेगा.










