नोएडा में सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता की मौत मामले में अब नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) ने गंभीर रुख अपनाया है. युवराज के वॉटरलॉग्ड ट्रेंच में डूबने की घटना पर NGT ने स्वतः संज्ञान लेते हुए कई अधिकारियों को नोटिस जारी किया है. न्यायमूर्ति प्रकाश श्रीवास्तव और न्यायमूर्ति सेंथिल की बेंच ने यह नोटिस भेजा है और विस्तृत जवाब मांगा है. NGT ने कहा है कि युवराज मेहता नोएडा के सेक्टर-150 में एक ऐसी जगह डूबे, जो पिछले कई सालों से बारिश का पानी और आसपास की कॉलोनियों की निकासी न होने के कारण एक स्थायी तालाब का रूप ले चुकी थी. जांच में सामने आया कि सिंचाई विभाग की 2015 की स्टॉर्म वाटर मैनेजमेंट योजना को लागू करने में देरी के कारण इस क्षेत्र में गंभीर जलभराव बना हुआ था.NGT ने सभी अधिकारियों को 3 अप्रैल से पहले अपना जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है. इस घटना के बाद जांच भी तेजी से आगे बढ़ रही है. मंगलवार को SIT की टीम नोएडा विकास प्राधिकरण के दफ्तर पहुंची. SIT में ADG मेरठ, मेरठ के डिविजनल कमिश्नर और PWD के चीफ इंजीनियर शामिल हैं.सूत्रों के अनुसार, SIT ने नोएडा अथॉरिटी के ट्रैफिक सेल, इलेक्ट्रिक सेल, और स्पोर्ट्स सिटी प्रोजेक्ट से जुड़े अधिकारियों से पूछताछ की है. बता दें कि जिस खाली जमीन के पास युवराज डूबे थे, उसी क्षेत्र में 2014 में स्पोर्ट्स सिटी प्रोजेक्ट शुरू किया गया था. इसके तहत 25% फ्लैट्स, 5% कमर्शियल और बाकी हिस्सा खेल संबंधी सुविधाओं के लिए डेवलप किया जाना था. 2019 में लोटस ग्रुप से यह क्षेत्र MJ Wish Town ने खरीद लिया था. इसी प्रोजेक्ट के मालिक अभय कुमार को पुलिस ने मंगलवार को गिरफ्तार किया.










