एक रिपोर्ट में कहा गया है कि पश्चिमी समाज, मीडिया और सरकारें अब भी “जिहादी आतंकवाद” को लेकर दूरदर्शिता की कमी दिखा रही हैं और पाकिस्तान समेत अन्य क्षेत्रों में इसकी गहराई, विचारधारा, प्रेरणाओं और बदलती रणनीतियों को समझने या प्रभावी ढंग से उससे निपटने में विफल रही हैं. इस स्थिति का लाभ उठाते हुए पाकिस्तान अपने क्षेत्र में सक्रिय आतंकवादी संगठनों को समर्थन दे रहा है, जो क्षेत्रीय विस्तारवाद, जातीय सफाए और व्यापक क्षेत्रीय इस्लामीकरण में संलिप्त हैं.अमेरिकी मीडिया आउटलेट ‘पीजे मीडिया’ के लिए लिखते हुए तुर्की मूल की पत्रकार उजाय बुलुत ने कहा, “कई पश्चिमी लोग जिहादी आतंकवाद को केवल विदेश नीति से जुड़ी शिकायतों या अलग-थलग घटनाओं के नजरिए से देखते हैं, न कि एक वैचारिक और धार्मिक रूप से प्रेरित परिघटना के रूप में. इसके कारण आतंकवाद-रोधी रणनीतियां कमजोर पड़ जाती हैं और कहीं न कहीं पाकिस्तान जैसे आतंकवाद को बढ़ावा देने वालों को अप्रत्यक्ष समर्थन भी मिल सकता है. यह संकीर्ण दृष्टि तब तक अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा को नुकसान पहुंचाती रहेगी, जब तक जिहादी आतंकवाद और उसके समर्थकों के प्रति पश्चिमी विदेश नीति में मूलभूत बदलाव नहीं होता.”










