कानपुर के हाई-प्रोफाइल लैंबॉर्गिनी हादसे में गिरफ्तार आरोपी शिवम मिश्रा को कोर्ट ने गुरुवार को जमानत दे दी है. शिवम को उसकी गिरफ्तारी के कुछ घंटे बाद ही जमानत मिल गई है. जबकि आपको बता दें कि इस मामले में आरोपी शिवम को गिरफ्तार करने में पुलिस को करीब चार दिन का समय लगा था. लेकिन कोर्ट में पुलिस की कोई दलील नहीं चली और शिवम जमानत पर रिहा हो गया. आरोपी को गिरफ्तारी के करीब सात घंटे बाद भले ही जमानत मिल गई हो लेकिन इस मामले में अभी भी कई ऐसे सवाल हैं जिनका जवाब मिलना अभी बाकी है. इस मामले से जुड़ा पहला सवाल तो ये कि अब जब शिवम मिश्रा को जमानत मिल गई है तो लैंबोर्गिनी कौन चला रहा था. चश्मदीद कह रहे हैं कि शिवम कार चला रहा था. पुलिस की तफ्तीश भी यही बताती है. लेकिन अब ड्राइवर मोहन का दावा है कि कार वो चला रहा था. उसके दावे में कितनी सच्चाई है ये एक जांच का मामला है. दूसरा सवाल ये कि क्या पुलिस किसी दबाव में काम कर रही है? हम ऐसा इसलिए कह रहे हैं क्योंकि मामले का सामने आने से लेकर आरोपी की गिरफ्तारी तक पुलिस एक के बाद एक कई गलतियां करती जा रही है. मसलन, आरोपी की समय रहते मेडिकल जांच क्यों नहीं कराई गई. चश्मीदीदों का दावा है कि घटना के समय आरोपी नशे में था. लेकिन पुलिस ने उस दौरान समय रहते उसका मेडिकल नहीं करवाया तो ऐसे में अब इसका पता नहीं चल सकता कि घटना के ठीक बाद वो नशे में था या नहीं.
