भारत और न्यूजीलैंड के बीच अगले हफ्ते फ्री ट्रेड डील साइन होने वाली है। न्यूजीलैंड सरकार के मंत्री भारत के साथ डील साइन करने के लिए नई दिल्ली आने वाले हैं।
इससे पहले न्यूजीलैंड के एक वरिष्ठ मंत्री ने इस डील का मजाक उड़ाते हुए विवादित बयान दिया है, जिसकी न्यूजीलैंड में रह रहे भारतीय समुदाय के लोग भी निंदा कर रहे हैं।
भारत-न्यूजीलैंड डील के कई फायदे
न्यूजीलैंड सरकार ने भारत के साथ होने वाली इस डील को किसी एक पीढ़ी में एक बार होने वाली डील बताया है। इस डील से न्यूजीलैंड के कारोबार को दुनिया के सबसे ज्यादा आबादी वाले देश भारत के विशाल घरेलू बाजार तक पहुंच मिलेगी।
अधिकारियों ने AFP को बताया है कि इस समझौते के तहत 20,000 से ज्यादा भारतीय, न्यूजीलैंड में प्रवेश कर सकते हैं।
न्यूजीलैंड के साथ इस फ्री ट्रेड डील का फायदा भारत को होने वाला है। इस डील के तहत न्यूजीलैंड अगले 15 सालों में भारत में 34 अरब NZ$ (18 खरब INR) का निवेश करेगा।
फ्री ट्रेड डील को बताया बटर-चिकन सुनामी
न्यूजीलैंड में सत्ताधारी गठबंधन की सहयोगी, दक्षिणपंथी लोकलुभावन पार्टी NZ First ने इस डर से इस डील से अपना समर्थन वापस ले लिया है, क्योंकि इससे देश की सीमाएं हजारों भारतीय नागरिकों के लिए खुल जाएंगी।
सोमवार को पार्टी के उप-नेता और क्षेत्रीय विकास मंत्री शेन जोन्स ने कहा कि उनकी पार्टी इस समझौते को कभी स्वीकार नहीं करेगी।
जोन्स ने रियलिटी चेक रेडियो से कहा, ‘मुझे इस बात की कोई परवाह नहीं है कि हमारी कितनी भी आलोचना हो, मैं न्यूजीलैंड में बटर चिकन सुनामी आने पर कभी सहमत नहीं हो सकता।’
भारतीय समुदाय के लोगों ने की निंदा
न्यूजीलैंड में भारतीय समुदाय के समूहों ने इन टिप्पणियों की व्यापक रूप से नस्लवादी बताते हुए निंदा की है। ऑकलैंड इंडियन एसोसिएशन की अध्यक्ष शांति पटेल ने पब्लिक ब्रॉडकास्टर RNZ से कहा, ‘यह हर किसी के लिए बेहद चिंताजनक है।’










