अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने ईरान के खिलाफ अपनी मर्जी से युद्ध शुरू किया, लेकिन इस युद्ध में यूनाइटेड स्टेट्स को भारी नुकसान उठाना पड़ा है। 28 फरवरी 2026 से शुरू हुआ युद्ध अभी भी किसी अंतिम परिणाम पर नहीं पहुंचा है।
पेंटागन के एक अंदरूनी अनुमान के मुताबिक, सेना ने अपने हजारों कीमती हथियारों का जखीरा खत्म कर दिया है, जिसमें टोमाहॉक क्रूज मिसाइलें और पैट्रियट इंटरसेप्टर मिसाइलें भी शामिल हैं।
ईरान के खिलाफ युद्ध में US को भारी नुकसान
अमेरिका और इजरायल ने मिलकर 28 फरवरी को ईरान पर हमला किया था, लेकिन इस हमले के बाद अमेरिका को ईरान से इतने बड़े पलटवार की उम्मीद नहीं थी कि ये हमला एक युद्ध में तब्दील हो जाएगा।
अमेरिका-ईरान के बीच एक महीने से भी ज्यादा समय तक युद्ध चला। इसके बाद दोनों देशों के बीच इस समय सीजफायर लागू है। लेकिन एक महीने से भी ज्यादा चले इस युद्ध में अमेरिका को भारी नुकसान झेलना पड़ा है।
व्हाइट हाउस ने इस युद्ध पर आई अनुमानित लागत का कोई आंकड़ा जारी नहीं किया है, लेकिन दो स्वतंत्र समूहों का कहना है कि इस युद्ध पर अब तक करीब 28 अरब डॉलर से लेकर 35 अरब डॉलर के बीच खर्च हो चुके हैं।
अमेरिका ने इस युद्ध पर हर दिन करीब 1 अरब डॉलर से कुछ कम खर्च किया है। यानी की अमेरिका ने युद्ध में हर दिन 94 अरब रुपये फूंक दिए। रिपोर्ट्स के मुताबिक, शुरुआती दो दिनों में ही सेना ने 5.6 अरब डॉलर के गोला-बारूद का इस्तेमाल कर दिया था।
11 लाख डॉलर की मिसाइल का किया इस्तेमाल
रक्षा विभाग के अंदरूनी अनुमानों का हवाला देते हुए, न्यूयॉर्क टाइम्स ने बताया कि अमेरिकी सेना ने अपनी लगभग 1,100 ‘जॉइंट एयर-टू-सरफेस स्टैंडऑफ मिसाइल-एक्सटेंडेड रेंज’ (JASSM-ER) दाग दी हैं, जो कि अमेरिका के पास मौजूद कुल 1,500 मिसाइलों के जखीरे के बराबर हैं।
JASSM-ER की मारक क्षमता 600 मील से भी ज्यादा है और इसे दुश्मन की हवाई सुरक्षा की सीमा से बाहर रहते हुए भी मजबूत ठिकानों को भेदने के लिए डिजाइन किया गया है। इसकी एक मिसाइल की कीमत करीब 11 लाख डॉलर है।
अमेरिकी सेना ने ईरान में 1,000 से भी ज्यादा टोमाहॉक क्रूज मिसाइलों का इस्तेमाल किया है, जो कि सेना के हर साल खरीदी जाने वाली मिसाइलों की संख्या से लगभग 10 गुना ज्यादा है। हर मिसाइल की कीमत लगभग 36 लाख डॉलर है।
टोमाहॉक लंबी दूरी की क्रूज मिसाइलें हैं, जिनका इस्तेमाल 1991 में हुए पहले खाड़ी युद्ध (Persian Gulf War) के बाद से ही अमेरिकी सेना युद्ध लड़ने के लिए बड़े पैमाने पर कर रही है।









