74 विधानसभा सीटों पर वर्ष 2021 के विजयी प्रत्याशियों को बदलने की रणनीति भी तृणमूल कांग्रेस के काम नहीं आई। इनमें से 51 सीटों पर उसे हार का सामना करना पड़ा। तृणमूल ने 15 प्रत्याशियों की सीटें भी बदलीं, लेकिन इसका भी उसे भारी नुकसान हुआ। वह उनमें से सिर्फ तीन सीटें ही जीत पाई।
तृणमूल ने इस बार अपने चार मंत्रियों को भी टिकट नहीं दिया था। उनमें से भी एक ही सीट हरिश्चंद्रपुर में तृणमूल को जीत नसीब हुई। बंगाल में सत्ता विरोधी हवा को देखते हुए तृणमूल ने पहली बार इस तरह का बदलाव किया था, जो पूरी तरह विफल साबित हुआ।
टीएमसी ने किन विधायकों को नहीं दी टिकट?
2021 का विधानसभा चुनाव जीते जिन लोगों को तृणमूल ने इस बार टिकट नहीं दिया था, उनमें बलागढ़ से मनोरंजन व्यापारी, मानिकचक से सावित्री मित्र, तमलुक से सौमेन महापात्र, उत्तरपाड़ा से कांचन मल्लिक, नोआपाड़ा से मंजु बसु, चुंचुड़ा से असित मजुमदार, श्रीरामपुर से सुदीप्त राय, पांडुआ से रत्ना दे नाग, बारासात से चिरंजीत चक्रवर्ती, पानिहाटी से निर्मल घोष, जोड़ासांको से विवेक गुप्ता, पलाशीपाड़ा से मानिक भट्टाचार्य, बड़ंचा से जीवनकृष्ण साहा समेत अन्य शामिल हैं।
इन मंत्रियों को भी नहीं दिया गया टिकट
इनमें मानिक भट्टाचार्य व जीवनकृष्ण साहा शिक्षक भर्ती घोटाले में आरोपित हैं। तृणमूल ने इस बार अपने जिन मंत्रियों को टिकट नहीं दिया था, उनमें मनोज तिवारी (शिवपुर), विप्लव रायचौधरी (पांसकुड़ा पूर्व), ज्योत्सना मांडी (रानीबांध) व ताजमुल हुसैन (हरिश्चंद्रपुर) शामिल हैं।
इनकी बदली गईं सीटें
जिनकी सीटें बदली गई थीं, उनमें शौकत मोल्ला (कैनिंग पूर्व से भांगड़), राणा चट्टोपाध्याय (बाली से शिवपुर), रत्ना चट्टोपाध्याय (बेहला पूर्व से बेहला पश्चिम) पूर्व पुलिस अधिकारी हुमायूं कबीर (डेबरा से डोमकल), बिदेश बसु (उलबेरिया पूर्व से सप्तग्राम), सोहम चक्रवर्ती (चंडीपुर से करीमपुर) समेत अन्य हैं। ये सभी चुनाव हार गए।
तृणमूल ने इस बार फिल्मी सितारों को भी टिकट नहीं देकर राजनीति से जुड़े लोगों पर ही भरोसा जताया था, लेकिन मतदाताओं ने उनमें से अधिकांश को नकार दिया।










