ईरान के एक शक्तिशाली कट्टरपंथी गुट ने अमेरिका के साथ चल रही बातचीत के खिलाफ जोरजार अभियान शुरू कर दिया है। उनका कहना है कि तेहरान को कोई भी समझौता केवल वॉशिंगटन को हराकर ही करना चाहिए।
‘जेभे-ये पायदारी’ के नाम से जाना जाने वाला और सुपर क्रांतिकारी कहा जाने वाला यह ग्रुप, वॉशिंगटन के साथ किसी भी समझौते का सबसे मुखर विरोधी बनकर उभरा है। एक रिपोर्ट के अनुसार, इस गुट ने मीडिया अभियानों, भाषणों, संसद में हस्तक्षेप और तेहरान में बड़ी-बड़ी रैलियों के जरिए अपना दबाव बढ़ा दिया है।
जर्मन इंस्टीट्यूट फॉर इंटरनेशनल एंड सिक्योरिटी अफेयर्स के हामिदरेजा अजीजी ने CNN को बताया कि वे अमेरिका और इजरायल के खिलाफ प्रतिरोध को एक अनंत लड़ाई के तौर पर देखते हैं।
शिया राष्ट्र दुनिया के अंत तक बना रहा चाहिए- अजीजी
अजीजी ने कहा कि वे एक ऐसे शिया राष्ट्र में विश्वास रखते हैं जिसका अस्तित्व दुनिया के अंत कर बना रहना चाहिए, और जब इस धार्मिक विधारधारा की बात आती है तो वे काफी कट्टर हो जाते हैं।
इस साल की शुरूआत में पूर्व सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के निधन के बाद इस गुट का उभार और भी ज्यादा स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगा है। जहां एक ओर ईरान का मौजूदा नेतृत्व बातचीत के दौरान एकता दिखाने की कोशिश कर रहा है, वहीं दूसरी ओर यह गुट लगातार देश के वार्ताकारों पर हमले कर रहा है और उन पर शासन की रेड लाइन पार करने का आरोप लगा रहा है।
कट्टरपंथी गुट ने वार्ताकारों को कायर बताया
इस गुट से जुड़े एक मीडिया संस्थान राजा न्यूज द्वारा प्रकाशित एक लेख में बातचीत में शामिल लोगों की आलोचना की गई और आरोप लगाया गया कि ईरानी नेताओं की हत्याओं के बावजूद वे अमेरिकी अधिकारियों के साथ हाथ मिलाने को तैयार हैं।
इस गुट के सदस्यों ने ईरान के मुख्य वार्ताकार मोहम्मद बाघर गलिबाफ पर सांठगांठ का आरोप भी लगाया है और वार्ताकारों को कायर कहा है। उन्होंने चेतावनी दी है कि ये बातचीत ईरान को भारी नुकसान पहुंचा सकती है।










