गोल्ड-पेट्रोल पर अपील के बाद अब एक्शन मोड में पीएम मोदी! PMO ने बनाया खास प्लान; जानिए और क्या बड़ा होने वाला है

पश्चिम एशिया (West Asia Crisis) में ईरान व अमेरिका के बीच सैन्य संघर्ष के चलते पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्थाओं पर संकट मंडरा रहा है। क्योंकि, इस जियोपॉलिटिकल तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतें (Crude Prices) बढ़ रही हैं और सप्लाई चैन बाधित होने से अन्य कमोडिटी प्राइस पर भी असर पड़ रहा है, और ये सभी कारण मिलकर महंगाई को बढ़ावा दे रहे हैं, जो वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए बड़ी चिंता का विषय है।

यही वजह है कि भारत सरकार ने इस संबंध में अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं और ईरान-अमेरिका युद्ध के बुरे असर को बेअसर करने में जुट गया है। दरअसल, प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) भारत की आर्थिक वृद्धि, महंगाई पर नियंत्रण और चालू खाते पर पड़ने वाले नकारात्मक प्रभावों को रोकने के लिए एक विस्तृत योजना तैयार कर रहा है।

मंत्रालयों से संपर्क कर रहा PMO 

ईटी की एक रिपोर्ट के अनुसार, इस संबंध में PMO अलग-अलग मंत्रालयों से समन्वय स्थापित कर रहा है ताकि विदेशी निवेश और निर्यात को बढ़ाया जा सके,साथ ही गैर-जरूरी आयात को कम किया जाए ताकि पश्चिम एशिया में चल रहे संकट से पैदा होने वाली चुनौतियों का सीधा असर, देश की आर्थिक तरक्की, महंगाई और करंट अकाउंट पर नहीं पड़े। वित्त मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि हालिया बदलावों के अलावा विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (FEMA) से संबंधित नियमों में ढील देने और द्विपक्षीय निवेश संधियों को निवेशकों के लिए अधिक अनुकूल बनाने के लिए कदम उठा रहे हैं।

किन मोर्चों पर काम कर रहा है PMO?

विदेशी निवेश और निर्यात को बढ़ावा: PMO विभिन्न मंत्रालयों (जैसे वित्त और वाणिज्य मंत्रालय) के साथ मिलकर विदेशी निवेश (FDI) को आकर्षित करने और निर्यात को बढ़ाने के नए अवसर तलाश रहा है।

FEMA नियमों में ढील: वित्त मंत्रालय विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (FEMA) के नियमों को और अधिक आसान बनाने पर काम कर रहा है ताकि विदेशी निवेशकों के लिए भारत में निवेश करना और सरल हो सके।

गैर-जरूरी आयात में कमी: सरकार व्यापार घाटे को कम करने के लिए चीन जैसे देशों से सस्ते और गैर-जरूरी आयात को कम करने पर विचार कर रही है। इसके बजाय घरेलू निर्माण (Domestic Manufacturing) को बढ़ावा देने पर जोर दिया जा रहा है। सोना, आभूषण और अन्य गैर-जरूरी चीजों के आयात को कम करने के प्रयास किए जा रहे हैं।

कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों का आकलन: नीति आयोग और वित्त मंत्रालय अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के प्रभाव का आकलन कर रहे हैं। नीति आयोग इस संबंध में एक रिपोर्ट भी तैयार करेगा।

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