नेपाल की राजधानी काठमांडू की सड़कें सोमवार को युवाओं से पट गईं. ये युवा भ्रष्टाचार और सोशल मीडिया पर लगाई गई पाबंदी का विरोध कर रहे हैं. पुलिस की कार्रवाई में अबतक 14 लोगों के मारे जाने की पुष्टी हुई है और कई लोग घायल हुए हैं. इसके बाद शहर के कई इलाकों में कर्फ्यू लगा दिया गया है. यह विरोध प्रदर्शन देश के दूसरे शहरों में भी फैल गया है. इस प्रदर्शन की एक बड़ी वजह सोशल मीडिया पर लगाई गई पाबंदी को बताया जा रहा है. इस फैसले के विरोधी इसे प्रेस की आजादी और नागरिकों की अभिव्यक्ति की आजादी पर हमला बता रहे हैं. इस पाबंदी की वजह से नेपाल के लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है, क्योंकि नेपाल के करीब हर घर का एक सदस्य दूसरे देश में रहता है, ऐसे में परिवार से संपर्क के लिए ये सोशल मीडिया ही एक जरिया था. आइए देखते हैं कि यह समस्या कितनी गहरी है.नेपाल ने क्यों लगाई सोशल मीडिया पर पाबंदीनेपाल ने चार सितंबर को 2023 में जारी सोशल नेटवर्क उपयोग प्रबंधन निर्देश का सहारा लेते हुए 26 सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर पाबंदी लगा दी थी. सोशल मीडिया पर नियंत्रण के लिए सरकार एक विधेयक भी संसद में लेकर आई है. इसमें इन प्लेटफॉर्म्स के लिए रजिस्ट्रेशन, स्थानीय ऑफिस और शिकायत अधिकारी रखना अनिवार्य होगा. सोशल मीडिया पर पाबंदी लगाए जाने के बाद प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली ने रविवार को कहा था कि देश को कमजोर करने के प्रयास कभी बर्दाश्त नहीं किए जाएंगे. उनकी यह टिप्पणी सरकार के इस कदम का विरोध शुरू होने के बाद आई थी.










