मध्य प्रदेश में जहां कक्षा एक से आठ तक की पढ़ाई कराने वाले 83,000 से ज्यादा सरकारी स्कूल हैं, वहां 200 से अधिक स्कूल आज भी बिना भवन के चलते हैं. यह स्कूल या तो पेड़ के नीचे चल रहे हैं या फिर किसी शेड के नीचे संचालित हो रहे हैं. लगभग 2 हजार स्कूलों में लड़कों के लिए शौचालय नहीं हैं और 1700 में लड़कियों के लिए शौचालय का अभाव है. ऐसे समय में किसी गांव में बनते हुए एक स्कूल का टूट जाना केवल ईंट-पत्थर का ढहना नहीं था, वह उस भरोसे का टूटना था जो लोग अब भी शिक्षा पर करते हैं. यह टूटन और भी पीड़ादायक इसलिए बनी, क्योंकि उसके साथ “अवैध मदरसा” की पहचान जुड़ गई थी.
यह घटना बैतूल जिले के भैंसदेही विधानसभा क्षेत्र के ढाबा गांव की है. यहां अब्दुल नईम नाम का एक शख्स अपने निजी खर्च से लगभग बीस लाख रुपये लगाकर एक छोटा सा स्कूल भवन बनवा रहा था. गांव की आबादी करीब दो हजार है और उसमें केवल तीन मुस्लिम परिवार हैं. नईम का कहना है कि तीन दिन पहले अचानक अफवाह फैलनी शुरू हुई कि वह यहां कोई “गैरकानूनी मदरसा” चला रहा है, जबकि भवन अभी अधूरा था, न कोई कक्षा लगी थी, न कोई बोर्ड टंगा था










