SGPGIMS में इलाज और जांच का खर्चा बढ़ा, आपकी जेब पर भी पड़ेगा असर, जानें कारण

    संस्थान को होने वाले वार्षिक नुकसान का आकलन करने के लिए गठित एक समिति द्वारा शुल्क बढ़ाने का निर्णय लिया गया था। रिसर्च के दौरान कमेटी ने पाया कि बेड चार्ज और डायग्नोस्टिक टेस्ट के खर्च को 10 साल से रिवाइज नहीं किया गया है।

    SGPGIMS Treatment Cost Increase: संजय गांधी पोस्टग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (एसजीपीजीआईएमएस) में इलाज और जांच अब महंगी होगी। नई बढ़ी हुई दरें तत्काल प्रभाव से लागू हो गई हैं। संस्थान को होने वाले वार्षिक नुकसान का आकलन करने के लिए गठित एक समिति द्वारा शुल्क बढ़ाने का निर्णय लिया गया था। रिसर्च के दौरान कमेटी ने पाया कि बेड चार्ज और डायग्नोस्टिक टेस्ट के खर्च को 10 साल से रिवाइज नहीं किया गया है।

    क्यों बढ़ा इलाज और जांच का खर्चा

    यह भी पाया गया कि कई उपकरणों व दवाओं को दूसरे देशों से आयात करना पड़ा। पिछले 10 वर्षों से डॉलर के मुकाबले रुपये में गिरावट आई है, इसके बाद आयात लागत 20 से 30 फीसदी तक बढ़ गई है। संस्थान के निदेशक प्रोफेसर आर.के. धीमान ने कहा: वृद्धि के बाद भी, दरें सस्ती हैं और इससे मरीजों पर ज्यादा बोझ नहीं पड़ेगा। बता दें कि लखनऊ स्थित संजय गांधी पोस्टग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज भारत के जाने में प्रतिष्ठित अस्पतालों में से एक हैं। ऐसे में उत्तर प्रदेश की बड़ी आबादी इस अस्पताल में इलाज के लिए जाती है। इस कारण अगर यहां इलाज व जांच का खर्चा बढ़ता है तो आम आदमी की जेब पर भी इसका असर देखने को मिल सकता है।

    अस्पताल की खासियत

    बता दें कि इस अस्पताल को साल 1983 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में स्थापित किया गया था। अपनी चिकित्सा सुविधाओं, डॉक्टरों और उपचार के कारण यह भारत के सर्वश्रेष्ठ 10 अस्पतालों में से एक है। बता दें कि एसजीपीजीआईएमएस अस्पताल उत्तर प्रदेश राज्य सरकार के अधीन आता है। बीते दिनों इस अस्पताल के नाम कई कीर्तिमान दर्ज हैं। बीते दिनों यहां अस्पताल में 500 से अधिक रोबोटिक सर्जरी कर नया कीर्तिमान स्थापित किया गया था।

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