ईरान एक बार फिर इतिहास के उसी मोड़ पर खड़ा है, जहां से 47 साल पहले सत्ता का तख्तापलट हुआ था. फर्क बस इतना है कि तब निशाने पर शाह मोहम्मद रजा पहलवी थे, और आज सत्ता के केंद्र में बैठे हैं सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामनेई.साल 1979: जब सड़कों से गिरा था शाह का तख्त1979 में ईरान में हुई इस्लामिक क्रांति ने सदियों पुरानी राजशाही को उखाड़ फेंका था. कारण बने-बढ़ती महंगाईबेरोजगारीपश्चिम समर्थक नीतियांजनता पर दमनइन सबके खिलाफ लाखों ईरानी सड़कों पर उतरे. इस जनविद्रोह की वैचारिक अगुवाई कर रहे थे अयातुल्ला रुहोल्लाह ख़ुमैनी. उस वक्त उन्होंने निर्वासन से लौटकर शाह की सत्ता का अंत कर दिया. रूहोल्लाह खुमैनी से अयातुल्लाह खामेनेई तक पहुंची सत्ता? दरअसल ईरान की सत्ता किसी वंश या खून के रिश्ते से नहीं, बल्कि धार्मिक-राजनीतिक उत्तराधिकार से चली है. रूहोल्लाह खुमैनी और अयातुल्ला अली खामेनेई के बीच पिता-पुत्र या पारिवारिक रिश्ता नहीं, बल्कि गुरु-शिष्य और क्रांति-सहयोगी का संबंध था.1979: खुमैनी की क्रांति रंग लाई और नया सिस्टम लागू हुआ. 1979 में शाह का तख्तापलट हुआ और अयातुल्ला रूहोल्लाह खुमैनी ईरान के पहले ‘सुप्रीम लीडर’ बने. इसके बाद खुमैनी ने ईरान में एक नया सिद्धांत लागू किया.
