उत्तर प्रदेश में 69 हजार सहायक शिक्षकों की भर्ती से जुड़े मामले में बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई. सुनवाई के दौरान कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार से कई अहम सवाल पूछे. कोर्ट ने पूछा कि क्या रिजर्व लिस्ट में रखे गए करीब 6800 अभ्यर्थियों को समायोजित किया जा सकता है या नहीं? इस पर यूपी सरकार की ओर से पेश वकील ने कोर्ट को बताया कि इस मुद्दे पर सरकार से सलाह लेकर स्थिति स्पष्ट की जाएगी. वकील ने यह भी कहा कि सरकार को इस प्रस्ताव पर मूलरूप से कोई आपत्ति नहीं है. लेकिन इसे लागू करने से पहले पूरी प्रक्रिया, नियम और कानूनी पहलुओं पर विचार करना जरूरी है. सरकार सीधे इन अभ्यर्थियों की नियुक्ति का फैसला नहीं ले सकती. इसके लिए आपसी सलाह-मशविरा जरूरी हैसुनवाई के दौरान जस्टिस दीपांकर दत्ता ने कहा कि सिर्फ 6800 रिजर्व अभ्यर्थियों तक ही बात सीमित न रखी जाए, बल्कि इससे ज्यादा अभ्यर्थियों की बहाली पर भी सरकार विचार करे. जस्टिस दत्ता ने यह आशंका भी जताई कि अगर भविष्य में कोई अन्य अभ्यर्थी कोर्ट आकर यह दावा करता है कि वह मेरिट लिस्ट में आता है और उसे भी नौकरी मिलनी चाहिए तो सरकार के सामने फिर नई कानूनी परेशानी खड़ी हो सकती है.
