बांग्लादेश की राजनीति में कभी हाशिए पर रहे शफीकुर रहमान आज सत्ता की सीढ़ियों के सबसे ऊंचे पायदान की ओर बढ़ते दिख रहे हैं. 67 वर्षीय डॉक्टर, जमात-ए-इस्लामी के अमीर और सियासी उतार-चढ़ाव के साक्षी रहे रहमान का चेहरा आज ढाका की सड़कों पर पोस्टरों और बिलबोर्ड्स पर छाया हुआ है. उनका दावा है अगर जमात सत्ता में आई तो बांग्लादेश 2040 तक अपनी जीडीपी चार गुना कर 2 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंचा सकता है.हाशिए से मुख्यधारा तक का सफर31 अक्टूबर 1958 को मौलवीबाजार (कुलाउरा) में जन्मे शफीकुर रहमान ने 1983 में सिलहट एमएजी उस्मानी मेडिकल कॉलेज से एमबीबीएस की पढ़ाई पूरी की. वे पेशे से डॉक्टर रहे और सिलहट में एक पारिवारिक अस्पताल के संस्थापक चेयरमैन हैं. उनकी पत्नी अमीना बेगम और उनके तीनों बच्चे भी डॉक्टर हैं- यह परिवार बांग्लादेश में फैमिली ऑफ डॉक्टर्स के रूप में जाना जाता है. रहमान ने 1973 में छात्र राजनीति में कदम रखा. शुरुआती दौर में वे वामपंथी छात्र संगठनों से जुड़े रहे, लेकिन 1977 में इस्लामी छात्र संगठन इस्लामी छात्र शिबिर से जुड़ गए. 1984 में उन्होंने आधिकारिक तौर पर जमात-ए-इस्लामी की सदस्यता ली.










