चीन की निजी रिफाइनर पर ट्रंप का प्रतिबंध… सिर्फ तेल ही नहीं, अन्य क्षेत्रों को भी पहुंचेगा नुकसान

अमेरिका ने चीन के सबसे बड़े निजी रिफाइनरी कंपनियों में से एक हेंगली पेट्रोकेमिकल पर ईरान से तेल खरीदने के आरोप में प्रतिबंध लगा दिए हैं। इस कदम का असर सिर्फ तेल क्षेत्र तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि चीन की पेट्रोकेमिकल उद्योग और एशिया की सप्लाई चेन पर भी व्यापक प्रभाव पड़ने की आशंका है।

शुक्रवार को अमेरिकी ट्रेजरी विभाग ने हेंगली पेट्रोकेमिकल रिफाइनरी कंपनी को अपनी प्रतिबंध सूची में शामिल कर दिया। यह चीन की रिफाइनिंग इंडस्ट्री पर अमेरिका का अब तक का सबसे बड़ा हमला माना जा रहा है। यह फैसला राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप और चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग के बीच मई में प्रस्तावित महत्वपूर्ण बैठक से ठीक पहले आया है।

चीन ईरानी तेल का सबसे बड़ा खरीदार

चीन कई वर्षों से ईरानी कच्चे तेल का सबसे बड़ा खरीदार रहा है। अधिकांश तेल निजी रिफाइनरियों के जरिए अप्रत्यक्ष रूप से चीन पहुंचता है, जिसे बाद में गैसोलीन, डीजल और अन्य ईंधन में बदला जाता है। चीन के आधिकारिक आंकड़ों में यह व्यापार दर्ज नहीं होता। ईरान से आखिरी सार्वजनिक रूप से दर्ज शिपमेंट कई साल पहले का है।

हेंगली चीन की सबसे आधुनिक और बड़े पैमाने वाली निजी रिफाइनरी कंपनियों में शामिल है। यह लियाओनिंग प्रांत में एक विशाल रिफाइनिंग और पेट्रोकेमिकल कॉम्प्लेक्स संचालित करती है। निजी रिफाइनरियां अब चीन की कुल रिफाइनिंग क्षमता का लगभग एक-तिहाई हिस्सा हैं। हेंगली इनमें सबसे बड़े प्लेयर्स में से एक है।

पेट्रोकेमिकल उद्योग पर डालेगा असर

यह प्रतिबंध चीन के पहले से दबाव में चल रहे पेट्रोकेमिकल उद्योग को और मुश्किल में डाल सकता है। हेंगली प्यूरीफाइड टेरेफ्थैलिक एसिड (PTA) का चीन का प्रमुख उत्पादक है और दुनिया के सबसे बड़े पेट्रोकेमिकल सप्लायर्स में शामिल है।

प्रतिबंध लगने के बाद हेंगली के एशिया में कम से कम दो पेट्रोकेमिकल ग्राहक पहले ही अपने ऑर्डर रद कर चुके हैं। डॉलर आधारित भुगतान प्रणाली से कट जाने के कारण पूर्वी एशिया के केमिकल, सिंथेटिक फाइबर और टेक्सटाइल उद्योगों में कच्चे माल की आपूर्ति बाधित हो सकती है।

अमेरिका का आरोप निराधार: हेंगली

रविवार को स्टॉक एक्सचेंज फाइलिंग में हेंगली कंपनी ने अमेरिकी आरोपों को निराधार बताया। कंपनी ने कहा कि उसने कभी ईरानी तेल से संबंधित कोई कारोबार नहीं किया है। सभी कच्चे तेल आपूर्तिकर्ताओं को अनुबंध के तहत यह सुनिश्चित करना होता है कि तेल अमेरिकी प्रतिबंध वाले देशों से न आए।

कंपनी ने बताया कि उसके पास तीन महीने से ज्यादा का कच्चा तेल स्टॉक है और भविष्य में वह चीनी युआन में भुगतान करके तेल खरीदने की योजना बना रही है। कोलंबिया यूनिवर्सिटी की एरिका डाउंस ने इसे साफ तौर पर एस्केलेशन बताया। उन्होंने कहा कि हेंगली ठीक उसी तरह की बड़ी रिफाइनिंग कंपनी है जिसे चीन बढ़ावा देना चाहता है। कंपनी सऊदी अरामको की भी ग्राहक है।

GL कंसल्टिंग की फाउंडर लियाओ ना ने कहा कि मई में ट्रंप की बीजिंग यात्रा को देखते हुए यह कदम वाशिंगटन का एक बार्गेनिंग चिप की तरह है। हेंगली की रिफाइनिंग क्षमता 4 लाख बैरल प्रतिदिन है। यह चीन के चार सबसे बड़े निजी रिफाइनरों में शामिल है, जो देश की कुल रिफाइनिंग क्षमता का करीब 10% संभालते हैं।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here