बाबूलाल मरांडी का हुंकार: चुनाव आयोग की मेहरबानी नहीं, कार्यकर्ताओं के लहू से बंगाल में खिला है कमल

झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने पश्चिम बंगाल में भारतीय जनता पार्टी की जीत पर प्रतिक्रिया देते हुए इसे कार्यकर्ताओं के संघर्ष का परिणाम बताया है। शुक्रवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (X) पर एक विस्तृत पोस्ट साझा करते हुए मरांडी ने उन लोगों को करारा जवाब दिया जो भाजपा की जीत का श्रेय ईवीएम या केंद्रीय बलों को दे रहे हैं।

बलिदान और संघर्ष का ‘महायज्ञ’ 

बाबूलाल मरांडी ने अपने पोस्ट को चार शीर्षकों में विभाजित कर बंगाल में पार्टी के सियासी सफर की व्याख्या की। ‘लाशों का अंबार और जलते हुए आशियाने’ शीर्षक के तहत उन्होंने लिखा कि 2011 से 2025 तक का सफर एक महायज्ञ की तरह था। नंदीग्राम से लेकर वीरभूम और कूचबिहार तक, भाजपा को वोट देने के ‘अपराध’ में कार्यकर्ताओं के घर जला दिए गए और उनकी हत्याएं की गईं।

बूथ अध्यक्षों और माताओं का संकल्प 

मरांडी ने बंगाल की जमीनी हकीकत को बयां करते हुए एक मार्मिक उदाहरण दिया:
    जिस बूथ अध्यक्ष की लाश सुबह पेड़ पर लटकी मिलती है, दोपहर को उसका बेटा कलेजे पर पत्थर रखकर उसी बूथ पर पोलिंग एजेंट बनकर खड़ा हो जाता है।

उन्होंने कहा कि 2026 की यह प्रचंड जीत उन बेटों के नाम है जिनकी शहादत पर उनकी माताओं ने विलाप करने के बजाय सत्ता परिवर्तन होने तक लड़ाई जारी रखने की कसम खाई थी।

2021 से 2026: विपक्ष से सत्ता तक 

नेता प्रतिपक्ष ने याद दिलाया कि 2021 में भाजपा 77 सीटों के साथ मुख्य विपक्ष बनी थी और अब 2026 में पूर्ण बहुमत की सरकार बनाने जा रही है। उन्होंने बंगाल की तासीर से अनजान लोगों पर तंज कसते हुए कहा कि जो लोग दिल्ली के दखल या केंद्रीय बलों को जीत की वजह मान रहे हैं, वे भाजपा कार्यकर्ताओं द्वारा 34 सालों तक झेले गए दमन और तानाशाही से वाकिफ नहीं हैं।

बाबूलाल मरांडी के अनुसार, यह जीत किसी मशीन की नहीं बल्कि उन हजारों गुमनाम चेहरों की है जिन्होंने अपनी जान की परवाह किए बिना लोकतंत्र की मशाल को जलाए रखा।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here