US Iran War: ईरान के खिलाफ लगातार हवाई हमले, भारी सैन्य दबाव और आर्थिक प्रतिबंधों के बावजूद अमेरिका अपने घोषित रणनीतिक लक्ष्य हासिल करता नहीं दिख रहा है। न तो ईरान का परमाणु कार्यक्रम पूरी तरह थमा है और न ही पश्चिम एशिया में तनाव कम हुआ है। ऐसे में अमेरिकी सैन्य प्रतिष्ठान अब पारंपरिक युद्ध से आगे बढ़कर नए विकल्पों पर विचार कर रहा है।
रिपोर्टों के मुताबिक, अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने विशेषज्ञों से गैर-परंपरागत रणनीतियों पर सुझाव मांगे हैं। इससे यह सवाल उठ रहा है कि क्या दुनिया की सबसे बड़ी सैन्य ताकत ईरान के खिलाफ अपनी मौजूदा रणनीति की सीमाओं को स्वीकार करने पर मजबूर हो गई है?
अमेरिका ने ईरान पर दबाव बनाने के लिए हवाई हमलों, प्रतिबंधों और सैन्य मौजूदगी का सहारा लिया, लेकिन अपेक्षित परिणाम नहीं मिले। भूमिगत परमाणु ठिकाने, ईरान की मिसाइल क्षमता और उसके क्षेत्रीय सहयोगी अमेरिकी रणनीति के सामने चुनौती बने हुए हैं। इसी कारण CENTCOM द्वारा विशेषज्ञों से नए सुझाव मांगने की खबर इस बात का संकेत मानी जा रही है कि केवल सैन्य ताकत के दम पर लक्ष्य हासिल करना कठिन साबित हो रहा है और वॉशिंगटन वैकल्पिक रास्तों पर भी विचार कर रहा है। ईरान ने वर्षों से अपने परमाणु और सैन्य ढांचे को इस तरह विकसित किया है कि उन्हें निशाना बनाना आसान नहीं है। फोर्डो और नतांज जैसे प्रमुख परमाणु केंद्र पहाड़ों के भीतर गहराई में बने हैं, जहां तक पहुंचना अत्याधुनिक बंकर बस्टर बमों के लिए भी चुनौती माना जाता है। दूसरी ओर, लगातार हमलों के बावजूद ईरानी नेतृत्व ने अपने सार्वजनिक रुख में कोई बड़ा बदलाव नहीं दिखाया, जिससे साफ है कि केवल हवाई अभियान निर्णायक साबित नहीं हो रहे। ईरान का विशाल और कठिन भूभाग किसी भी बाहरी सेना के लिए बड़ी चुनौती माना जाता है। इराक और अफगानिस्तान के लंबे अभियानों का अनुभव पहले ही अमेरिका को भारी आर्थिक और राजनीतिक कीमत चुका चुका है। ऐसे में ईरान में बड़े पैमाने पर जमीनी युद्ध शुरू करना वर्षों तक चलने वाले संघर्ष में बदल सकता है। यही वजह है कि वॉशिंगटन सैन्य कार्रवाई और राजनीतिक जोखिम के बीच संतुलन बनाने की कोशिश कर रहा है। अब किन गैर-परंपरागत विकल्पों पर नजर है? विश्लेषकों के अनुसार अमेरिका अब साइबर ऑपरेशन, आर्थिक प्रतिबंधों को और सख्त करने तथा ईरान पर कूटनीतिक दबाव बढ़ाने जैसे विकल्पों पर अधिक जोर दे सकता है। साइबर हमलों के जरिए महत्वपूर्ण ढांचे को प्रभावित करना, वित्तीय नेटवर्क को कमजोर करना और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ईरान को अलग-थलग करने की रणनीति चर्चा में है। हालांकि इन उपायों की प्रभावशीलता और उनके संभावित परिणामों को लेकर विशेषज्ञों के बीच अलग-अलग राय है।
विशेषज्ञों से सुझाव मांगना सीधे तौर पर सैन्य हार का संकेत नहीं माना जा सकता, बल्कि इसे जटिल संघर्ष के लिए नए विकल्प तलाशने की प्रक्रिया भी माना जाता है। आधुनिक युद्ध केवल हथियारों से नहीं, बल्कि साइबर क्षमता, आर्थिक दबाव, कूटनीति और खुफिया अभियानों से भी प्रभावित होते हैं। ऐसे में यह कहना जल्दबाजी होगी कि अमेरिका “बर्बाद” हो चुका है, लेकिन इतना जरूर है कि ईरान के खिलाफ पारंपरिक सैन्य रणनीति अकेले निर्णायक साबित नहीं हुई है और वॉशिंगटन अब बहुआयामी विकल्पों की तलाश में है।










