बांग्लादेश में तारिक रहमान के नेतृत्व में BNP ने प्रचंड जीत हासिल कर ली है. पार्टी दो-तिहाई बहुमत के साथ सरकार बना रही है. 2024 के जुलाई विद्रोह में शेख हसीना सरकार के पतन के बाद का यह पहला चुनाव था और इसके नतीजे का असर पूरे दक्षिण एशिया के सामरिक समीकरण पर होना है. इस नतीजे पर भारत की भी नजर है और नापाक मंसूबे रखने वाले पाकिस्तान की भी. बांग्लादेश में जमात-ए-इस्लामी की करारी हार आज पाकिस्तान को खुद की हार की तरह लग रही होगी क्योंकि वह जमात के कट्टरपंथी नीतियों के भरोसे भारत को घेरने की फिराक में था. चलिए समझते हैं कि बांग्लादेश चुनाव में BNP की जीत और जमात की हार को पाकिस्तान किस नजर से देख रहा होगा.पहले तो जान लीजिए की पाकिस्तान के राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी और वहां के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने BNP और तारिक रहमान को इस शानदार जीत की बधाई दी है. लेकिन यह तो दिखाने वाला चेहरा हो गया. परदे के पीछे की सच्चाई यही है कि पाकिस्तान को इस नतीजे से टीस लगी है. दक्षिण एशिया मामलों के जानकार माइकल कुगेलमैन के अनुसार पाकिस्तान तो यही चाहता था कि बांग्लादेश में जमात-ए-इस्लामी की सरकार बने. उन्होंने यह भी कहा था कि अगर बीएनपी की सरकार बनती है, तो पाकिस्तान उसे भी स्वीकार करेगा. लेकिन उन्होंने चेतावनी दी कि इस्लामाबाद चाहेगा कि बीएनपी भारत के साथ रिश्ते सुधारने की कोशिश न करे, क्योंकि इससे पाकिस्तान की हाल की कोशिशों को झटका लगेगा.
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