ईरान इस वक्त इतिहास के सबसे खतरनाक मोड़ पर खड़ा है. महंगाई, बेरोजगारी और दमन के खिलाफ सुलग रही चिंगारी अब आग बन चुकी है. तेहरान से मशहद तक, करमानशाह से रश्त तक कम से कम 100 शहरों में विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं. लोग सड़कों पर उतरे हुए हैं. इन प्रदर्शनों में अब तक 60 से ज़्यादा मौतें हुई हैं. ईरान के 31 में से 26 प्रांतों में हालात बेकाबू हैं. महिलाएं, युवा, मजदूर सब सड़कों पर हैं. नारे गूंज रहे हैं, ‘खामेनेई मुर्दाबाद’, ‘शाह जिंदाबाद’. लेकिन दूसरी तरफ है, ईरान की सबसे ताकतवर कुर्सी. सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की कुर्सी. खामेनेई किसी भी कीमत पर सत्ता छोड़ने को तैयार नहीं हैं. सड़कों पर बगावत, गोलियों की गूंजतेहरान की सड़कों पर जली हुई गाड़ियां, सरकारी इमारतों पर हमले साफ देखे जा सकते हैं. सीसीटीवी उखाड़े जा रहे हैं और कुछ जगहों पर प्रदर्शनकारियों ने सुरक्षा बलों को घेर कर पीट दिया है. उत्तर ईरान में गवर्नर का हेडक्वार्टर जला दिया गया. खामेनेई के गृहनगर मशहद में हजारों लोग अमेरिका से मदद की गुहार लगाते दिखे.ईरान ने चौथे बड़े शहर कराज का सिटी हॉल जला दिया गया है. भीषण प्रदर्शनों का असर इस कदर हावी है कि सरकार को स्टारलिंक और जीपीएस सिग्नल भी जाम करने पड़े हैं.
