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होर्मुज में भारतीय जहाजों पर फायरिंग मामला: भारत के विदेश मंत्रालय ने कहा- स्थिति पर हमारी नजर

पश्चिम एशिया संघर्ष की वजह से होर्मुज जल मार्ग में तनाव एक बार फिर चरम पर पहुंच गया है। ईरान की नौसेना ने शनिवार को होर्मुज जलडमरूमध्य में दो भारतीय जहाजों समेत तीन जहाजों पर गोलीबारी की और उन्हें जबरन पश्चिम दिशा में वापस मोड़ दिया।

इनमें से एक जहाज इराक से 20 लाख टन तेल ले कर भारत आ रहा था। ईरान सरकार की मीडिया ने इस बात की पुष्टि की है। इस घटना की गंभीरता को देखते हुए भारत सरकार ने तुरंत कार्रवाई की। विदेश मंत्रालय में ईरान के राजदूत डॉ. मोहम्मद फतहाली को बुला कर भारत की नाराजगी से अवगत कराया और यह मांग की है कि होर्मुज में फंसे भारतीय जहाजों को जल्द से जल्द वहां से निकालने में मदद करें।

होर्मुज के पश्चिमी हिस्से में अभी भी 15 भारतीय जहाज फंसे हुए हैं। अभी स्थिति यह है कि होर्मुज से ईरानी नौ सेना जहाजों को बाहर नहीं निकलने दे रही और बाहर अमेरिकी सेना की नाकेबंदी है।भारतीय विदेश मंत्रालय ने कहा है कि, “’इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान के नई दिल्ली स्थित राजदूत को आज शाम विदेश मंत्रालय द्वारा विदेश सचिव के साथ बैठक के लिए बुलाया गया।

भारत ने जताई चिंता

बैठक में विदेश सचिव ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में दो भारतीय ध्वज वाले जहाजों पर हुई गोलीबारी की घटना पर भारत की गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने वाणिज्यिक जहाजों और नाविकों की सुरक्षा को भारत के लिए बेहद महत्वपूर्ण बताया। विदेश सचिव ने याद दिलाया कि ईरान ने पहले भारत जाने वाले कई जहाजों को सुरक्षित मार्ग प्रदान करने में सहयोग किया था।

गोलीबारी की इस गंभीर घटना पर चिंता दोहराते हुए विदेश सचिव ने राजदूत से आग्रह किया कि वे भारत के इन विचारों को ईरान के उच्चतम अधिकारियों तक पहुंचाएं और भारत जाने वाले जहाजों को स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से पार कराने की प्रक्रिया को शीघ्रातिशीघ्र फिर से शुरू करें।

ईरान के राजदूत ने भारत के इन विचारों को अपने देश की सरकार तक पहुंचाने का आश्वासन दिया।”यह पहला मौका है जब भारतीय फ्लैग वाले जहाज पर ईरान की तरफ से हमला किया गया हो। साथ ही भारतीय विदेश मंत्रालय में ईरानी राजदूत को बुलाने की घटना बिरले ही होती है।

यह पहली बार नहीं है जब पश्चिम एशिया के संघर्ष में भारतीय जहाजों को निशाना बनाया गया हो। इससे पहले भी इस क्षेत्र में एक भारतीय जहाज पर हमला हुआ था, जो अमेरिका की तरफ से हुआ था। उस घटना ने भी समुद्री सुरक्षा को लेकर गंभीर ¨चता पैदा की थी। उस घटना के बाद अंतरराष्ट्रीय मंचों पर पीएम नरेन्द्र मोदी और विदेश मंत्री ने एस जयशंकर ने एक से ज्यादा बार नाविकों व जहाजों पर हुए हमले को अस्वीकार्य बताया है।

यह घटना इसिलए भी ज्यादा महत्वपूर्ण है कि ईरान आधिकारिक तौर पर यह कहता रहा है कि उसने मित्र देशों के जहाजों को होर्मुज से बाहर निकलने से नहीं रोक रखा है। दो हफ्ते पहले ईरान के विदेश मंत्री ने चीन, रूस, पाकिस्तान के साथ भारत का भी नाम मित्र देशों की श्रेणी में लेते हुए कहा था कि इनके जहाजों को बाहर निकलने दिया जाएगा।

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