महाराष्ट्र में पिछले 5 वर्षों की राजनीति का चुनावों पर क्या पड़ेगा असर?तीन मुख्यमंत्री और कई सियासी भूचाल.

    पिछले पांच वर्षों में महाराष्ट्र की राजनीति में अप्रत्याशित उथल-पुथल हुई है. राज्य की जनता ने एक के बाद एक कई सियासी झटके देखे.लेकिन क्या जनता इन झटकों को पचा पाई, यह आने वाले हफ़्तों में साफ हो जाएगा. मंगलवार को चुनावों की घोषणा के साथ राज्य में छह प्रमुख राजनीतिक दलों की परीक्षा 16 अक्तूबर से शुरू होगी.महाराष्ट्र में 288 सीटों पर विधानसभा चुनाव हो रहे हैं. 2019 से 2024 तक पांच साल का कार्यकाल महाराष्ट्र की राजनीति में अप्रत्याशित घटनाओं का दौर रहा है.सवाल ये है कि आख़िर बीते पांच वर्षों में महाराष्ट्र में सियासी तस्वीर कैसे बदल गई है? आने वाले चुनाव राजनीति और मतदाताओं के लिए मुख्य रूप से क्या बदलाव लेकर आए हैं?

    अब किस पार्टी के कितने विधायक?

    सबसे पहले तो इस बार चुनावों में दो नई पार्टियां नजर आएंगीं. दरअसल, ये दोनों नई पार्टियां पिछली बार चुनाव लड़ चुकी दो पार्टियों से अलग होकर बनी हैं. पिछले पांच वर्षों की राजनीतिक घटनाओं की वजह से इन पार्टियों का गठन हुआ है.

    महाराष्ट्र विधानसभा में शिवसेना शिंदे गुट के पास 40 विधायक हैं. बीजेपी के पास 103 विधायक और एनसीपी के अजित पवार गुट के पास 40 विधायक हैं.

    दूसरी ओर, महाविकास अघाड़ी में एनसीपी के शरद पवार गुट के पास 13 विधायक, शिवसेना के उद्धव ठाकरे गुट के साथ 15 विधायक और कांग्रेस के 43 विधायक हैं.

    इसके अलावा राज्य में बहुजन विकास अघाड़ी के तीन 3, समाजवादी पार्टी के 2, ऑल इंडिया मजलिस ए इत्तेहादुल मुस्लिम के 2, प्रहार जनशक्ति 2, एमएनएस के 1, कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (मार्क्सवादी) – 1, शेकांप 1, स्वाभिमानी पार्टी 1, राष्ट्रीय समाज पार्टी 1, महाराष्ट्र जनसुराज्य शक्ति पार्टी के 1, क्रांतिकारी शेतकारी पार्टी के 1 और निर्दलीय 13 विधायक हैं.

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