यूपी में विधानसभा चुनाव तो दो साल दूर है लेकिन सियासी पारा अभी से ही चढ़ने लगा है. भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) और समाजवादी पार्टी में जनता को अपना बनाने की होड़ मची है. सरकारी नौकरी बड़ा मुद्दा है. इस तरह की नौकरी सामाजिक और आर्थिक सुरक्षा की गारंटी है. इसीलिए सरकारी नौकरी का आकर्षण दिनों दिन बढ़ता जा रहा है. ऊपर से बेरोजगार नौजवानों की फौज. इस दिनों कांट्रैक्ट पर नौकरी देने का चलन बढ़ गया है. जिसे आउटसोर्सिंग कहते हैं. जब मन करे तब सेवा समाप्त. नौकरी देने वाले पर किसी तरह की कोई ज़िम्मेदारी नहीं होती है. आउटसोर्सिंग पर नौकरी को लेकर तनातनी बढ़ती जा रही है. सत्ता में रहने के बावजूद बीजेपी और सहयोगी दलों में इस मुद्दे पर मतभेद हैं. अपना दल नेता और मोदी सरकार में मंत्री अनुप्रिया पटेल इस पर मन की बात करती रही हैं. उनका आरोप हैं कि कांट्रैक्ट पर नौकरी में आरक्षण के नियमों का पालन नहीं होता है. बाक़ी सहयोगी दलों के नेता ओम प्रकाश राजभर और संजय निषाद की भी यही डिमांड है. आज़मगढ़ में आज अखिलेश यादव ने भी घोषणा कर दी. उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी की सरकार बनने पर ये व्यवस्था ख़त्म कर दी जाएगी. सभी राजनैतिक दलों की नज़र युवा वोटर पर है.
