नियति का खेल भी कितना क्रूर होता है। जिस घर में कुछ दिन बाद बेटे के आने की खुशियां मनाई जानी थी, वहां अब मौत का सन्नाटा पसरा है. जम्मू-कश्मीर के डोडा में हुए भीषण सड़क हादसे ने यमुनानगर के शेरपुर गांव के सुधीर नरवाल (30) को हमसे छीन लिया. सुधीर तीन भाई-बहनों में सबसे छोटे और घर के इकलौते चिराग थे.27 जनवरी का वो वादा अधूरा रह गयापरिवार के सदस्यों ने भारी मन से बताया, कि सुधीर से आखिरी बार 15 जनवरी को बात हुई थी. उन्होंने वादा किया था कि वे 27 जनवरी को छुट्टी लेकर घर आएंगे. पिछली बार दिवाली पर घर आए सुधीर एक शादी में शामिल होकर 12 नवंबर को ड्यूटी पर लौटे थे. परिवार को क्या पता था कि वह उनकी आखिरी मुलाकात होगीमां का करुण क्रंदन: “मेरे लाल को वापस ले आओ”सुधीर की शहादत की खबर मिलते ही घर में कोहराम मच गया. मां का रो-रोकर बुरा हाल है और वे सुध-बुध खो बैठी हैं. अपने इकलौते बेटे को खोने के गम में डूबी मां हर आने-जाने वाले से बस एक ही गुहार लगा रही हैं, “मेरे सुधीर को वापस ले आओ.” गहरे सदमे में डूबी मां की जुबान से निकला एक-एक शब्द वहां मौजूद लोगों की आंखें नम कर रहा है, वे कह रही हैं- “अपने बेटे को कभी आर्मी में मत भेजना.”
