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ये कैसा जिहाद… ये पूछते-पूछते दम तोड़ गई मां, आतंकी बेटा कंधा देने भी नहीं आया

बेटा वापस आ जाओ, मेरा ख्याल रखना, और अगर मैं मर जाऊं तो मुझे कंधा देना. मैंने बहुत दुख सहा है. यह किस तरह का जिहाद है, जहां माता-पिता को छोड़ दिया जाता है?” जाना बेगम की ये भावुक अपील भी काम नहीं आई. बेटा मां की मौत के बाद कंधा देने भी नहीं आया. सवाल ये है कि क्या कोई भी वजह बेटे को मां को कंधा देने से रोक सकती है? बेटा कितना भी मजबूर क्यों न हो मां के अंतिम वक्त में आने की कोशिश जरूर करता है. लेकिन जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ में जाना बेगम की अंतिम इच्छा अधूरी ही रह गई. वह अपने जिगर के टुकड़े को देखना चाहती थी लेकिन बेटा आया ही नहीं. टूट गई मां की उम्मीद की डोरबेटे के मां से ना मिलने की वजह भी जान लीजिए. दरअसल जाना बेगम का बेटा रियाज अहमद हिजबुल एक आंतकी है. उनसे 15 साल पहले ही घर छोड़ दिया था. बेबस माता-पिता बेटे को आखिरी बार देखने की उम्मीद ही लगाए रहे. कुछ महीने पहले बेबस मां ने बेटे से हाथ जोड़कर विनती की थी वह आतंक के रास्ते से वापस घर लौट आए लेकिन उसने एक न सुनी. मां की अंतिम इच्छा भी जैसे उसके लिए कोई मायने ही नहीं रखती थी

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