उत्तर प्रदेश में मदरसा शिक्षा व्यवस्था को पारदर्शी, आधुनिक और व्यवस्थित बनाने के योगी सरकार के प्रयासों के सकारात्मक परिणाम सामने आने लगे हैं। उत्तर प्रदेश मदरसा शिक्षा परिषद की वर्ष 2026 की परीक्षाओं में परीक्षार्थियों की संख्या में हुई उल्लेखनीय वृद्धि इसका स्पष्ट प्रमाण है। पिछले वर्ष की तुलना में इस बार परीक्षार्थियों की संख्या में लगभग 18.29 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जो मदरसा शिक्षा प्रणाली के प्रति बढ़ते सामाजिक विश्वास का संकेत है।
आंकड़ों में बड़ा बदलाव: 12 हजार से अधिक की वृद्धि
आंकड़ों पर गौर करें तो साल 2025 में जहाँ कुल 68,423 विद्यार्थियों ने परीक्षा दी थी, वहीं इस वर्ष यह संख्या बढ़कर 80,933 तक पहुँच गई है। इस प्रकार पिछले साल के मुकाबले 12,510 अधिक परीक्षार्थी इस बार परीक्षा में शामिल हुए। सरकार द्वारा परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता लाने, नकलविहीन माहौल तैयार करने और समय पर परिणाम घोषित करने की प्रतिबद्धता ने विद्यार्थियों और अभिभावकों के मन में एक नया भरोसा पैदा किया है।
सख्त निगरानी में संपन्न हुई परीक्षा
परिषद द्वारा संचालित मुंशी/मौलवी (सेकेण्डरी) एवं आलिम (सीनियर सेकेण्डरी) की परीक्षाएं 9 फरवरी को प्रदेश के 71 जनपदों के 277 केंद्रों पर शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुईं। परीक्षा को निष्पक्ष बनाने के लिए योगी सरकार ने सीसीटीवी कैमरों से केंद्रीकृत निगरानी व्यवस्था लागू की थी। इसके साथ ही जनपद स्तर पर सचल दल, सेक्टर मजिस्ट्रेट और स्टेटिक मजिस्ट्रेट तैनात किए गए थे, जिससे पूरी प्रक्रिया सुव्यवस्थित वातावरण में पूरी हुई।
छात्राओं की भागीदारी और भविष्य की तैयारी
इस वर्ष के आंकड़े यह भी दर्शाते हैं कि मदरसा शिक्षा में छात्राओं की रुचि और भागीदारी लगातार मजबूत हो रही है। मुंशी/मौलवी परीक्षा में जहाँ 29,843 छात्राएं शामिल हुईं, वहीं आलिम परीक्षा में छात्राओं की संख्या (9,609) छात्रों (9,092) से भी अधिक रही। परिषद अब मई माह में परीक्षा परिणाम घोषित करने की तैयारी में है, ताकि विद्यार्थियों को आगे की पढ़ाई और प्रवेश प्रक्रियाओं में समय पर लाभ मिल सके। योगी सरकार की इन नीतियों ने मदरसों को मुख्यधारा की शिक्षा से जोड़ने की दिशा में एक निर्णायक कदम बढ़ाया है।
