बंगाल में दो चरणों में होने वाले विधानसभा चुनाव के पहले चरण की वोटिंग से एक दिन पहले, बुधवार को ममता बनर्जी ने “बदल नॉय, बदला चाई (बदलाव नहीं, बदला चाहिए)” का नारा दिया। इसके साथ ही उन्होंने 2011 के अपने पुराने नारे “बदला नॉय, बदल चाई (बदला नहीं, बदलाव चाहिए)” को पलट दिया।
उन्होंने 2011 में अपनी ऐतिहासिक जीत के साथ राज्य में दशकों पुराने लेफ्ट फ्रंट के किले को ढहा दिया था। उत्तरी 24 परगना के आमडांगा और हुगली के हरिपाल में रैलियों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा, “2011 में मैंने कहा था ‘बदला नॉय, बदल चाई’ (बदला नहीं, बदलाव चाहिए)। इस बार मैं कहती हूं ‘बदल नॉय, बदला चाई’ – (बदलाव नहीं, बदला चाहिए)। बैलेट बॉक्स के जरिए बदला, लोकतंत्र के लिए बदला। हम बंगाल को लंका की तरह जलने नहीं देंगे।”
क्या आप गोली चलाना चाहते हैं : ममता
रिकॉर्ड संख्या में केंद्रीय बलों की तैनाती को लेकर BJP पर हमला बोलते हुए उन्होंने कहा, “क्या आपने कभी ऐसा चुनाव सुना है जहां वे दिल्ली से इतनी ज्यादा फोर्स लाकर लड़ते हों? आप बख्तरबंद गाड़ियां ले आए हैं, सेना के साथ बैठकें की हैं, BSF, CRPF, रेलवे और एविएशन – हर राज्य से फोर्स तैनात कर दी है। क्यों? क्या आप गोली चलाना चाहते हैं? अपनी बख्तरबंद गाड़ियां ले आइए; मैं अकेली खड़ी रहूंगी।”
उन्होंने आगे कहा, “क्या आपको बंगाल में चुनाव कराने के लिए सेना की जरूरत है? जाइए, उन्हें मणिपुर भेजिए, वहां तीन साल से शांति नहीं है।” ममता ने सेवारत अधिकारियों को भी BJP के इशारे पर काम करने के खिलाफ चेतावनी दी। “आप भूल गए हैं कि आने वाले दिनों में आपको बंगाल में ही काम करना है। IPS और WBPS अधिकारियों की अपनी गरिमा होती है। अपनी निष्पक्षता बनाए रखें।”
केंद्रीय सुरक्षा बलों पर लगाया आरोप
उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्रीय बल “BJP जिंदाबाद” के नारे लगा रहे हैं, और पूछा, “आप सिर्फ तृणमूल को ही क्यों निशाना बना रहे हैं? राकेश सिंह जैसे आपराधिक पृष्ठभूमि वाले BJP उम्मीदवारों को गिरफ्तार क्यों नहीं किया जा सकता?” तृणमूल के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी ने बुधवार को एक रैली को संबोधित करते हुए कहा कि, BJP को ऐसा जवाब दिया जाना चाहिए कि वह “बंगाल के साथ दोबारा विश्वासघात करने से पहले 100 बार सोचे।”
वहीं, बाद में, बंगाल के पूर्व DGP और तृणमूल सांसद राजीव कुमार, जो CEO मनोज अग्रवाल से मिलने वाले प्रतिनिधिमंडल का हिस्सा थे, उन्होंने कहा, “पुलिस पर्यवेक्षकों के मौखिक आदेशों के बाद 500 से ज्यादा गिरफ्तारियां की गई हैं। हर उस अधिकारी का नाम चार्जशीट में शामिल किया जाएगा, जिसने गैर-कानूनी गिरफ्तारी के आदेश दिए हैं या उनमें मदद की है, और उसे अदालत के सामने पेश किया जाएगा। राज्य की सीमाएं कोई सुरक्षा नहीं देती, न ही राजनीतिक छूट मिलती है।”
