राजा महमूदाबाद द्वारा 99 वर्ष की लीज पर दी गई कई संपत्तियों की अवधि अगले वर्ष समाप्त हो रही है। प्रशासन अब इन संपत्तियों को अपने कब्जे में लेगा।
शत्रु संपत्ति संरक्षक कार्यालय ने स्पष्ट किया है कि अब कब्जेदारों की लीज अवधि को आगे नहीं बढ़ाया जाएगा। लखनऊ में कई संपत्तियां हैं जिन पर किराएदार लंबे समय से काबिज हैं।
राजधानी में लगभग दो सौ चिह्नित शत्रु संपत्तियां हैं। इन संपत्तियों के कब्जेदारों पर करोड़ों रुपये का किराया बकाया है, जिसके लिए लगातार नोटिस जारी किए जा रहे हैं। इसके बावजूद अधिकांश कब्जेदार लंबे समय से किराया जमा नहीं कर रहे हैं। सबसे अधिक 125 शत्रु संपत्तियां सदर तहसील में स्थित हैं।
स्वामित्व को लेकर कोर्ट में चल रहा मामला
इसके अलावा कई संपत्तियों के स्वामित्व को लेकर कोर्ट में मामले चल रहे हैं। कई कब्जेदारों ने लीज की शर्तों का उल्लंघन करते हुए संपत्तियों के मूल स्वरूप में भी छेड़छाड़ की है। कुछ कब्जेदारों ने शत्रु संपत्ति संरक्षक कार्यालय की अनुमति के बिना निर्माण कराकर तीसरी पार्टी को किराए पर दे रखा है।
राजा अमीर अहमद खान के निधन के बाद उनके बेटे राजा मोहम्मद अमीर मोहम्मद खान उर्फ सुलेमान मियां 1975 में लंदन से भारत लौटे और संपत्तियों पर कब्जे के लिए दावा किया। लंबी अदालती लड़ाई चली, जो सुप्रीम कोर्ट तक पहुंची, लेकिन शत्रु संबंधी अध्यादेश पारित होने के बाद सरकार ने सभी संपत्तियों पर कब्जा कर लिया।
1965 और 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्धों के मद्देनजर, भारत से लोगों का पाकिस्तान में प्रवास हुआ। भारत की रक्षा अधिनियम, 1962 के तहत बनाए गए भारत रक्षा नियमों के अनुसार, सरकार ने पाकिस्तानी राष्ट्रीयता लेने वालों की संपत्तियों को शत्रु संपत्ति घोषित करते हुए कब्जे में ले लिया। इसी के तहत राजा महमूदाबाद की सभी संपत्तियां सरकार के अधीन हो गईं।
लखनऊ की कुछ प्रमुख शत्रु संपत्तियां
राजा महमूदाबाद मोहम्मद आमिर मोहम्मद खान से जुड़ा बटलर पैलेस, हलवासिया कोर्ट, लारी बिल्डिंग, महमूदाबाद मेंशन, पुराना एसएसपी कार्यालय भवन, कैसरबाग हाता, गोलागंज स्थित लाल कोठी, अमीना बाद की वारसी बिल्डिंग, चौक इलाके की कनीज सईदा बेगम पुरानी बाड़ी खाना कोठी, क्ले स्क्वायर स्थित हैदरी बेगम हवेली, अब्दुल लतीफ हाता खां, अब्दुल खलीम की नौबस्ता स्थित पुरानी इमारत और सिद्दीकी बिल्डिंग।
